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(रैम) What is RAM – Random Access Memory

What is RAM – Random Access Memory – जनरली  Epic शब्द, यानी रैम (RAM) के नाम से जानी जाती है), जो की  कंप्यूटर data collection का एक रूप है। आज यह integrated circuit के  रूप बदलती जा रही  है जो stored data को किसी भी order में, यानी  जैसी  इच्छा हो, (random) Accessed होने की allowance प्रदान करता है। Random शब्द इस प्रकार इस Fact को refer करता है कि डाटा का कोई भी हिस्सा अपनी physical condition और चाहे यह डाटा के previous part  से संबंधित हो या न हो, इन सबकी परवाह किए बगैर निर्धारित समय में वापस आ सकता है। यह system Bus के साथ की frequency पर काम करती है जो SDRAM कहलाती है जो आजकल कम्पयूटरों में सबसे अधिक commonly used होती है। 

What is RAM - Random Access Memory
रैम (RAM)

 इसके विपरीत, storage devices जैसे magnetic disks और optical discs, recording medium या readable सिरे की physical speed  पर निर्भर करते हैं। इन devices में, speed  से  data transfer होने में ज्यादा  समय लगता है और अगली content की physical condition के आधार पर recovery time बदलता रहता है।

 रैम (RAM) शब्द अक्सर अस्थिर या volatile प्रकार की मेमोरी (जैसे : डी रैम (DRAM) memory module) से संबंधित होता है जैसे ही  power की supply बंद होती है इसमें स्टोर सूचना मिट  जाती है। अधिकतर रोम (ROM) और नोर-फ़्लैश (NOR-Flash) कहे जाने वाले एक प्रकार के फ़्लैश मेमोरी सहित कई अन्य प्रकार की मेमोरी रैम (RAM) ही  है।

 RAM दो प्रकार की होती है। Static RAM और  Dynamic RAM होती है। 

 

इतिहास History

An initial type of extensive writable random-access memory का एक initial type वर्ष 1949 से 1952 तक विकसित magnetic core memory  था और बाद में सन् 1960 के दशक के अंत में और सन् 1970 के दशक के आरम्भ में stable और dynamic integrated रैम (RAM) सर्किट्स का विकास होने तक अधिकांश कंप्यूटरों में इसका प्रयोग किया जाता था। 

इससे पहले, “मुख्य” मेमोरी implement(यानी , सैकड़ों या हज़ारों बिट्स) को कार्यान्वित करने के लिए कंप्यूटरों में रिले, delay line memory या विभिन्न प्रकार की वैक्यूम ट्यूब arrangements का इस्तेमाल होता था जिनमें से कुछ random access होते थे और कुछ नहीं. वैक्यूम ट्यूब ट्रायोड से और बाद में discrete transistors से निर्मित disks को Relatively छोटे और तेज़ मेमोरी जैसे random access register बैंकों और रजिस्टरों के लिए प्रयोग किया जाता था। 

Integrated रोम सर्किट्स  के विकास से पहले, permanent (या रीड-ओनली) random-access memory का निर्माण अक्सर address inspectors द्वारा संचालित semiconductor diode metrics का प्रयोग करके किया जाता था।

Modern types के राइटेबल रैम (RAM) ज्यादातर डाटा का एक बिट या तो फ्लिप-फ्लॉप अवस्था में जैसे static Ram, या किसी कपैसिटर या (ट्रांज़िस्टर गेट) में charge के रूप में जैसे DRAM (dynamic RAM, EPROM,EEPROM और फ़्लैश में store करते हैं।

 कुछ प्रकारों में parity bit या error correction codes का प्रयोग करके stored डाटा में मेमोरी error कहलाने वाले random errors का पता लगाने के लिए या उन्हें सुधारने के लिए circuitry होती है।

 रीड-ओनली प्रकार के रैम,  रोम (ROM), चार्ज को स्टोर  करने के बजाय सिलेक्टेड ट्रांज़िस्टरों को स्थायी रूप से activate / deactivate  करने के लिए धातु के एक मास्क का प्रयोग करता है।

Static RAM और Dynamic RAM कैसे काम करते है। (कार्य प्रणाली )


चूंकि स्थैतिक रैम  और डायनामिक रैम  दोनों ही टेम्पररी  होते हैं इसलिए कंप्यूटर स्टोरेज  के अन्य रूपों जैसे हार्ड disk और मैग्नेटिक टेप का प्रयोग ट्रेडिशनल  कंप्यूटरों में permanent storage के रूप में करता  है। 

कई नए products डाटा के रखरखाव के लिए इसके बजाय फ़्लैश मेमोरी पर निर्भर रहते हैं जब उनका उपयोग नहीं होता है।  

जैसे PDAs और  small music players. कुछ personal computers, 

जैसे कई fast computers और netbooks में  magnetic disk ड्राइव  को भी फ़्लैश ड्राइवों के साथ बदल दिया है। 

फ़्लैश मेमोरी के साथ, सीधे code execution की अनुमति प्रदान करते हुए केवल नोर (NOR) प्रकार यानी  random access में सक्षम है और इसलिए अक्सर रोम (ROM) के बजाय इसका प्रयोग किया जाता है; 

कम लागत वाले नन्द (NAND) प्रकार का प्रयोग आम तौर पर मेमोरी कार्डों और ठोस-अवस्था वाले ड्राइवों में bulk storage के लिए किया जाता है।


माइक्रोप्रोसेसर की तरह, मेमोरी चिप भी लाखों ट्रांज़िस्टरों और संधारित्रों(capacitors) से मिलकर बना एक integrated circuit (आईसी (IC)) होता है। 

कंप्यूटर मेमोरी के सबसे सामान्य रूप, गतिशील dynamic random access memory में मेमोरी सेल का निर्माण करने के लिए एक ट्रांज़िस्टर और एक capacitor को जोड़ा जाता है जो केवल एक बिट डाटा को दर्शाता है। 

कपैसिटर में सूचना की एक बिट होती है — एक 0 या एक 1. 

ट्रांज़िस्टर एक स्विच की तरह काम करता है जो मेमोरी चिप की control circuitry को capacitor को पढ़ने या उसकी अवस्था में परिवर्तन करने के लिए  allow करता है।

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