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Monday, September 25, 2017

कंप्यूटर का परिचय | कंप्यूटर का इतिहास | कंप्यूटर का आविष्कार Computer History in Hindi


कंप्यूटर का परिचय | कंप्यूटर का इतिहास | कंप्यूटर का आविष्कार Computer History in Hindi कंप्यूटर सचमुच में  एक अभिकलक यंत्र (programmable machine) है जो दिये गये गणितीय और  Logical operations को योजना से ऑटोमैटिक रूप से करने में सक्षम है। 

इसे अंक गणितीय, Logical operations व अन्य विभिन्न प्रकार की कॅल्क्युलेशन्स को सही रूप से पूर्ण करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से निर्देशित किया जा सकता है।

 चूंकि किसी भी कार्य योजना को पूरा करने के लिए इंस्ट्रक्शंस का क्रम बदला जा सकता है इसलिए कंप्यूटर एक से ज्यादा तरह की कार्यवाही को अंजाम दे सकता है। इस गाइडेंस को ही कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग कहते है और कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की मदद से यूजर के निर्देशो को समझता है। मैकेनिकल कंप्यूटर कई सदियों से मौजूद थे किंतु आजकल कंप्यूटर से आशय मुख्यतः बीसवीं सदी के मध्य में विकसित हुए विद्दुत चालित कंप्यूटर से है। 
Computer History Images
Computer History Images

तब से अबतक यह आकार में क्रमशः छोटा और कार्यक्षेत्र की दृष्टि से अत्यधिक क्रियाशील होता गया हैं। अब कंप्यूटर घड़ी के अन्दर समा सकते हैं और बैटरी से चलाये जा सकते हैं। निजी कंप्यूटर के विभिन्न रूप जैसे कि पोर्टेबल कंप्यूटर, टैबलेट आदि रोजमर्रा की जरूरत बन गए हैं।

पारंपरिक कंप्यूटर में एक सीपीयू और डाटा स्टोरेज के लिए मेमोरी  होती है। सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट अरिथमेटिक व लॉजिकल कॅल्क्युलेशन्स को अंजाम देती है और एक इंडेक्सिंग  व कण्ट्रोल यूनिट  मेमोरी में रखे इंस्ट्रक्शंस के आधार पर ऑपरेशन्स का आर्डर बदल सकती है। पेरीफेरल या सरफेस पे लगे इक्विपमेंट किसी बाहरी सोर्स से सूचना ले सकते है व प्रोसीडिंग्स के रिजल्ट को मेमोरी में सुरक्षित रख सकते है व जरूरत पड़ने पर दुबारा प्राप्त कर सकते हैं।

इंटीग्रेटेड सर्किट  पर आधारित Modern computer  पुराने जमाने के computer के मुकबले करोड़ो अरबो गुना ज्यादा समर्थ है और बहुत ही कम जगह लेते है। सामान्य कंप्यूटर इतने छोटे होते है कि मोबाइल फ़ोन में भी समा सकते है और मोबाइल कंप्यूटर  एक छोटी सी बैटरी  से मिली एनर्जी से भी काम कर सकते है। (Computer History in Hindi)

ज्यादातर लोग "Computers" के बारे में यही राय रखते है कि अपने विभिन्न स्वरूपों में Personal computer इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी  युग के नायक है। हालाँकि Contrived कंप्यूटर  जो कि ज्यादातर उपकरणों जैसे कि Mp3 player, वायुयान व खिलौनो से लेकर औद्योगिक ह्यूमन इंस्ट्रूमेंट में पाये जाते है लोगो के बीच ज्यादा प्रचलित है।

बीसवीं शताब्दि से पहले के कम्प्यूटर्स 

मैकेनिकल लीनियर (एनालॉग) कम्प्यूटर्स का प्रारंभ प्रथम शताब्दी में होना शुरू हो गया था जिन्हे बाद में मध्यकालीन युग में खगोल शास्त्रीय गणनाओ के लिए इस्तेमाल भी किया गया। मैकेनिकल लीनियर कम्प्यूटर्स को द्धितीय विश्व युद्ध के दौरान स्पेशलाइज्ड सैन्य कार्यो में उपयोग किया गया। इसी समय के दौरान पहले Electric numerical circuit वाले कम्प्यूटर्स का विकास हुआ। प्रारम्भ में वो एक बड़े कमरे के आकार के होते थे और आज के आधुनिक सैकड़ों पर्सनल कम्प्यूटर्स के बराबर बिजली का उपभोग करते थे। पहली इलेक्ट्रॉनिक Digital computer यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में 1940 और 1945 के बीच विकसित किया गया।

कॅल्क्युलेशन्स करने के लिये instruments का इस्तेमाल हज़ारो वर्षो से होता आ रहा है खासकर उग्लियो से गिनती करने वाले devices का। शुरुवाती गणन इंस्ट्रूमेंट्स  सम्भवत:  वो लकड़ी जिस पर गिनती के लिये दांत खोदे गये हो या मिलान छड़ी का एक रूप थी। बाद में मध्य पूर्व में उपजाऊ भूमि के एक भौगोलिक क्षेत्र जो कि आकार में अर्द्ध चंद्र जैसा दिखता है में रिकार्ड्स  को रखने के लिए कॅल्क्युली (मिटटी के गोले, शंकु) का इस्तेमाल होता रहा, जो की अधपके और खोखले मिटटी के बर्तनो में रखा होता था। इनका उपयोग सामान की गिनती (अधिकतर पशुधन व अनाज) दर्शाने के लिए किया जाता था।  
गिनती की छड़ों का उपयोग इसका एक उदहारण है।

इस गिनतारे पर प्रदर्शित हो रही संख्या है
 (इस गिनतारे पर प्रदर्शित हो रही संख्या है 6,302,715,408)

शुरुवात में गिनतारे का उपयोग अंकगणितीय कार्यो के लिए होता था। जिसे आज हम रोमन गिनतारा कहते है उसका उपयोग 2400 ईसा पूर्व के प्रारम्भ में बेबीलोनिआ में हुआ था। तब से अब तक गणना  व हिसाब लगाने के लिए कई अन्य काउंटिंग बेल्ट  व गोलियो का आविष्कार हो चुका है। एक मध्ययुगीन युरोपीय गणना,  घर में मेज पर चितकबरे कपडे को रख दिया जाता था और कुछ विशेष नियमो के अनुसार उसपर मोहरों को चलाकर पैसे जोड़ने के लिए एक साधन के तौर पे इस्तेमाल किया जाता था।

प्राचीन यूनानी रूपरेखा वाले एंटीकाईथेरा प्रक्रिया 250 से 100 ईसा पूर्व के समय के दुनिया के सबसे पुराने Linear कंप्यूटर  हैं।
एंटीकाईथेरा प्रक्रिया
एंटीकाईथेरा प्रक्रिया
डेरेक जे. डी-सोला के अनुसार एंटीकाईथेरा प्रक्रिया को शुरुवाती यान्त्रिक अनुरूप कैलकुलेटर  माना जाता है। इसे खगोलिय स्थितियो की गणना के लिये बनाया गया था। इसे एंटीकाईथेरा के युनानी द्वीप के एंटीकाईथेरा खंडहर में 1901 में खोजा गया था। इसे 100 ईसा पूर्व के समय का पाया गया। ऐसा माना जाता है कि एंटीकाईथेरा प्रक्रिया जैसी जटिलता वाले यन्त्र अगले 1000 वर्षो तक मिलने मुश्किल है। Computer History in Hindi

प्राचीन और मध्ययुगीन कम्प्यूटर्स

प्राचीन और मध्ययुगीन कालों में खगोलीय गणनाओं के परफॉरमेंस  के लिए कई एनालॉग कंप्यूटरों का निर्माण किया गया था। इनमें शामिल हैं प्राचीन ग्रीस की एंटिकिथेरा प्रक्रिया और एस्ट्रॉलैब (लगभग 150-100 ईसा पूर्व), जिन्हें आम तौर पर सबसे शुरूआती  यांत्रिक एनालॉग कंप्यूटर माना जाता है। एक या अन्य प्रकार की गणनाओं के परफॉरमेंस के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले मैकेनिकल  devices के अन्य प्रारंभिक Versions में शामिल हैं

 Plainsphere और अबू रेहान अल बिरूनी  द्वारा आविष्कृत अन्य Mechanical computer equipment है। अन्य मध्ययुगीन मुस्लिम एस्ट्रोनॉमर्स और इंजीनियरों के खगोलीय एनालॉग Computer; और सोंग राजवंश के दौरान सू सोंग (लगभग 1090 ईसा पश्चात्) का खगोलीय क्लॉक टावर है।

कंप्यूटर के विकास का संक्षिप्त इतिहास

1623 ई.: जर्मन गणितज्ञ विल्हेम शीकार्ड ने प्रथम मैकेनिकल कैलकुलेटर  का विकास किया। यह कैलकुलेटर जोड़ने, घटाने, गुणा व भाग में सक्षम था।
1642 ई.: फ्रांसीसी गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल ने जोड़ने व घटाने वाली मशीन का आविष्कार किया।

1801 ई.: फ्रांसीसी वैज्ञानिक जोसेफ मेरी जैकार्ड ने लूम (करघे) के लिए नई नियंत्रण प्रणाली का प्रदर्शन किया। उन्होंने लूम की प्रोग्रामिंग की, जिससे पेपर कार्डों में छेदों के पैटर्न के द्वारा मशीन को मनमुताबिक वीविंग ऑपरेशन (weaving operation) का आदेश दिया जाना सम्भव हो गया।

1833-71 ई.: ब्रिटिश गणितज्ञ और वैज्ञानिक चार्ल्स बैबेज ने जैकार्ड पंच-कार्ड प्रणाली का प्रयोग करते हुए 'एनालिटिकल इंजन' का निर्माण किया। इसे वर्तमान कम्प्यूटरों का पूर्वगामी माना जा सकता है। बैबेज की सोच अपने काल के काफी आगे की थी और उनके आविष्कार को अधिक महत्व नहीं दिया गया।

1889 ई.: अमेरिकी इंजीनियर हरमन हॉलेरिथ ने 'इलेक्ट्रो मैकेनिकल पंच कार्ड टेबुलेटिंग सिस्टम' को पेटेंट कराया जिससे सांख्यिकी आँकड़े की भारी मात्रा पर कार्य करना सम्भव हो सका। इस मशीन का प्रयोग अमेरिकी जनगणना में किया गया।

1941 ई.: जर्मन इंजीनियर कोनार्डसे ने प्रथम फुल्ली  फंक्शनल डिजिटल कम्प्यूटर Z3 का आविष्कार किया जिसे प्रोग्राम द्वारा नियंत्रित किया जा सकता था। Z3 इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर नहीं था। यह विद्युतीय स्विचों पर आधारित था जिन्हें रिले कहा जाता था।

1942 ई.: आइओवा स्टेट कॉलेज के भौतिकविद जॉन विंसेंट अटानासॉफ और उनके सहयोगी क्लिफोर्ड बेरी ने प्रथम पूर्णतया इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर के कार्यात्मक मॉडल का निर्माण किया जिसमें वैक्यूम ट्यूबों का प्रयोग किया गया था। इसमें रिले की अपेक्षा तेजी से काम किया जा सकता था। यह प्रारंभिक कम्प्यूटर प्रोग्रामेबल नहीं था।

1944 ई.: आईबीएम और हार्वर्ड यूनीवॢसटी के प्रोफेसर हॉवर्ड आइकेन ने प्रथम लार्ज स्केल ऑटोमेटिक डिजीटल Computer 'मार्क-1' का निर्माण किया। यह रिले आधारित मशीन 55 फीट लम्बी व 8 फीट ऊँची थी।

1943 ई.: ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन कोडों को तोडऩे के लिए इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर 'कोलोसस' का निर्माण किया।

1946 ई.: अमेरिकी सेना के लिए पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में भौतिकविद् जॉन माउचली और इंजीनियर जे. प्रेस्पर इकेर्ट ने 'इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटेड एंड कम्प्यूटर - इनिएक' (ENIAC) का निर्माण किया। इस कमरे के आकार वाले 30 टन कम्प्यूटर में लगभग 18,000 वैक्यूम ट्यूब लगे थे। इनिएक की प्रोग्रामिंग अलग-अलग कार्य करने के लिए की जा सकती थी।
इनिएक' (ENIAC)
इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटेड एंड कम्प्यूटर - इनिएक' (ENIAC)
1951 ई.: इकेर्ट और माउचली ने प्रथम कॉमर्शियल कम्प्यूटर 'यूनिवेक' (UNIVAC) का निर्माण किया (सं.रा. अमेरिका)।

1969-71 ई.: बेल लेबोरेटरी में 'यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम' का विकास किया गया।

1971 ई.: इंटेल ने प्रथम कॉमॢशयल माइक्रोप्रोसेसर '4004' का विकास किया। माइक्रोप्रोसेसर चिप पर सम्पूर्ण कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग यूनिट होती है।

1975 ई.: व्यावसायिक रूप से प्रथम सफल पर्सनल computer 'MITS Altair 8800' को बाजार में उतारा गया। यह किट फार्म में था जिसमें की-बोर्ड व वीडियो डिस्प्ले नहीं थे।

1976 ई.: पर्सनल कम्प्यूटरों के लिए प्रथम वर्ड प्रोग्रामिंग प्रोग्राम 'इलेक्ट्रिक पेंसिल' का निर्माण।

1977 ई.: एप्पल ने 'एप्पल-II' को बाजार में उतारा, जिससे रंगीन टेक्स्ट और ग्राफिक्स का प्रदर्शन संभव हो गया।

1981 ई.: आई बी एम ने अपना पर्सनल कम्प्यूटर बाजार में उतारा जिसमें माइक्रोसॉप्ट के DOS (डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम) का प्रयोग किया गया था।

1984 ई.: एप्पल ने प्रथम मैकिंटोश बाजार में उतारा। यह प्रथम कम्प्यूटर था जिसमें GUI (ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस) और माउस की सुविधा उपलब्ध थी।

1990 ई.: माइक्रोसॉफ्ट ने अपने ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस का प्रथम वजऱ्न 'विंडोज़ 3.0' बाजार में उतारा।

1991 ई.: हेलसिंकी यूनीवर्सिटी के विद्यार्थी लाइनस टोरवाल्ड्स ने पर्सनल कम्प्यूटर के लिए 'लाइनेक्स' का आविष्कार किया।

1996 ई.: हाथ में पकड़ने योग्य कम्प्यूटर 'पाम पाइलट' को बाजार में उतारा गया।

2001 ई.: एप्पल ने मैकिंटोश के लिए यूनिक्स आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम 'Mac OS X' को बाजार में उतारा।

2002 ई.: कम्प्यूटर इंडस्ट्री रिसर्च फर्म गार्टनेर डेटा क्वेस्ट के अनुसार 1975 से वर्तमान तक मैन्यूफैक्चर्ड कम्प्यूटरों की संख्या 1 अरब पहुँची।

2005 ई.: एप्पल ने घोषणा की कि वह 2006 से अपने मैकिंटोश कम्प्यूटरों में इंटेल माइक्रोप्रोसेसरों का प्रयोग आरंभ कर देगा।

कम्प्यूटर के लाभ और हानि

लाभ


  1. यह संचार का सबसे अच्छा माध्यम है
  2. इससे किसी भी संसाधन को साझा करने में आसानी होती है
  3. यह सभी प्रकार के फाइल को साझा करने का बेहतरीन डिवाइस है
  4. यह एक सस्ता डिवाइस है
  5. इससे समय की बचत होती है
  6. इसमें डॉक्यूमेंट रखने के लिए बहुत जगह होता है

हानि 

  1. गलत तरीके से उपयोग करने पर समय की बर्बादी होती है
  2. इससे शारीरिक गतिविधियों में कमी होती है
  3. ब्लड सर्कुलेशन  सही से नहीं हो पता है
  4. ज्यादा भोजन खाना और मोटापा बढ़ना
  5. कमर और सर में दर्द की शिकायत
  6. आँखों या दृष्टि में कमजोरी होना
  7. अनिद्रा की असुविधा होना
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